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बिहार के बाहुबली नेता शहाबुद्दीन को तेजाब कांड में सजा दिलाने वाले चंदा बाबू अब नहीं रहे

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तेजाब कांड के गवाह चंद्रकेश्वर प्रसाद उर्फ चंदा बाबू का निधन उनके आवास पर हो गया। परिजन उन्हें इलाज के लिए सदर अस्पताल ले गए, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। डॉक्टरों ने बताया कि उनकी मौत हार्ट अटैक से हुई है। मौत की सूचना मिलते हैं उनके घर पर काफी संख्या में नेताओं एवं अन्य लोगों की भीड़ उमड़ पड़ी। चंदा बाबू पिछले कुछ दिनों से अस्वस्थ चल रहे थे। बता दें कि चंदा बाबू के दो पुत्रों को तेजाब से नहलाकर हत्या करने का आरोप राजद के पूर्व सांसद मोहम्मद शहाबुद्दीन पर लगा था।

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मामले में शहाबुद्दीन को निचली अदालत ने सजा भी सुनाई थी। इसके बाद उनके तीसरे पुत्र राजीव रोशन जो चंदा बाबू के साथ इस कांड का मुख्य गवाह भी था उसकी भी हत्या अपराधियों ने शहर के डीएवी मोड़ पर गोली मारकर हत्या कर दी थी। इसके बाद पिछले वर्ष ही चंदा बाबू की पत्नी का निधन हो गया था। शहर के गौशाला रोड स्थित साधारण व्यवसाई चंद्र केशव प्रसाद और चंदा बाबू के घर खुशहाली का माहौल 2004 के स्वतंत्रता दिवस से पूर्व तक सामान्य था। दो भाई में छोटे भाई सिवान रहकर अपने व्यवसाय संभालते थे जबकि एक भाई पटना में अधिकारी थे।

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चंदा बाबू का एक भरा पूरा परिवार था, पढ़ी-लिखी पत्नी थी और चार बच्चे थे। तीन बच्चे अलग-अलग दुकानों पर व्यवसाय संभाल रहे थे जबकि एक बच्चा दिव्यांग होने की वजह से उन दोनों का साथ रहता था। परिणाम स्वरूप प्रतिरोध के रूप में चंदा बाबू के दो पुत्रों को शहर के अलग-अलग दुकानों से अपहरण कर लिया गया था। मां कलावती देवी ने अपने दोनों बच्चों के अपहरण को लेकर मुफस्सिल थाने में प्राथमिकी दर्ज करवा दी लेकिन प्राथमिकी दर्ज होने के बाद भी दोनों बच्चे नहीं मिले। अपहरण को लेकर मामला न्यायालय में स्थानांतरित हो गया। चंदा बाबू को कई प्रकार के धमकी भी मिली लेकिन चंदा बाबू का साहस ही था की मामला तेजाब कांड के रूप में चर्चित हो गया।

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