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मालिनी अवस्थी ने सुरों से सजाया बॉलीवुड रायटर मनीष किशोर का पहला भोजपुरी गाना

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कई हिंदी फ़िल्म और सीरीयल लिखने वाले मशहूर लेखक मनीष किशोर ने लोक महाआस्‍था के पर्व छठ को लेकर एक भोजपुरी गाना ‘आजा बबुआ’ लिखा है, जिसे पद्मश्री मालिनी अवस्थी ने अपनी आवाज में गाया है। मनीष किशोर इससे पहले बॉलीवुड फिल्‍म शरमन जोशी अभिनीत ‘काशी इन सर्च ऑफ गंगा’ का लेखन व निर्माण कर चुके हैं। बिहार से आने वाले मनीष ने अब अपनी माटी का फर्ज अदा करते हुए एक भोजपुरी गाना बिहार वासियों को भेंट किया है।

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‘आजा बबुआ’ नाम के इस गाने को t-series ने रिलीज़ किया, इसके म्यूज़िक डायरेक्‍टर बिहार के ही अभिषेक अमोल हैं और म्‍यूजिक वीडियो का निर्देशन बिहार के मशहूर निर्देशक धीरज कुमार ने किया है। मनीष एक दशक से हिंदी फ़िल्म और टीवी के जाने माने राइटर हैं, जिन्होंने क्राइम पट्रोल और सीआईडी जैसे सीरीयल का लेखन किया है। साथ ही वे ‘कौन बनेगा करोड़पति’ और ‘इंडियन आइडल’ जैसे शो में बतौर क्रीएटिव और राइटर काम किया है। वो ‘पाकिस्तान आइडल’ में भी बतौर क्रीएटिव काम कर चुके हैं।

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उनकी फ़िल्म काशी इन सर्च ऑफ गंगा को भी लेखनी के लिए काफ़ी सराहा गया। अभी वो पुलकित सम्राट अभिनीत सुस्वागतम् ख़ुशामदीद पर काम कर रहे हैं, जिसकी शूटिंग दिसम्बर में शुरू हो रही है। धीरज कुमार द्वारा निर्देशित इस फ़िल्म के निर्माता मनीष ही हैं और इस फ़िल्म के लेखक भी हैं। इसके अलावा मनीष की 2021 में तीन अन्य फ़िल्मे आने वाली हैं, जो कोरोना के कारण इस साल नहीं आ पायी।

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आपको बता दें कि मनीष पटना से हैं और उन्होंने दिल्ली में बतौर पत्रकार कई न्यूज़ चैनल और पत्रिकाओं में काम किया है। लेकिन उनकी सिनेमा की भूख उन्हें मुंबई ले आयी जहाँ उनके काम को बहुत सराहा जा रहा है, वो 2021 में बतौर गीतकार भी अपना खाता खोल रहे हैं, लेकिन उनका सपना था कि उनका पहला गीत छठ

का हो और धीरज ने यह ख़्वाब पूरा किया। पद्मश्री मालिनी अवस्थी ने उनके शब्दों की गहराई को समझा और उनके शब्दों में अपनी आवाज़ से जान डाल दी। आजा बबुआ एक भावुक गीत है जिससे हर बिहारी बेटा और माँ जुड़ जाएँगे।

WhatsApp Image 2020 11 15 at 6.41fgcमनीष के माता पिता और परिवार पटना में ही रहते है और मनीष अकेले मुंबई में रहते हैं, लेकिन वो अभी भी पटना से बेहद जुड़े हैं और उनका ये जुड़ाओ इस गाने की हर शब्द से छलकता है । मनीष का मानना है कि‍ अपनी भाषा और अपने जन्मस्थल के लिए अगर हम कुछ नहीं कर पाए, तो हर कुछ बेमानी है। आजा बबुआ उनका अनुभव है, उनका एहसास है, उनकी भावना है जो उन्होंने गीत के रूप में दुनिया के सामने रखा है ।

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